सिलवासा। दादरा एवं नगर हवेली में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए श्रीमती देवकीबा मोहनसिंहजी चौहान कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड साइंस, सिलवासा में मुंबई विश्वविद्यालय के Centre for Distance and Online Education (CDOE) का विधिवत शुभारंभ किया गया। यह केंद्र प्रदेश के विद्यार्थियों, नौकरीपेशा युवाओं, गृहिणियों और किसी कारणवश पढ़ाई अधूरी छोड़ चुके लोगों के लिए उच्च शिक्षा के नए द्वार खोलने वाला साबित होगा। विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो किसी कारणवश नियमित शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते। विशेष बात यह है कि दूरस्थ एवं ऑनलाइन माध्यम से किए गए इन पाठ्यक्रमों की डिग्री मुंबई विश्वविद्यालय के नियमित पाठ्यक्रमों के बराबर ही मान्य होगी, जिससे विद्यार्थियों को नौकरी, प्रतियोगी परीक्षाओं और आगे की पढ़ाई में समान अवसर प्राप्त होंगे।लायंस क्लब ऑफ सिलवासा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित इस प्रतिष्ठित संस्थान में आयोजित कार्यक्रम “Expression of Interest to Expression of Excellence” थीम के साथ संपन्न हुआ, जो डिजिटल और दूरस्थ शिक्षा के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बना। भारतीय परंपरा के अनुसार दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस गरिमामयी अवसर पर ट्रस्ट के माननीय अध्यक्ष श्री फतेहसिंहजी एम. चौहान, सचिव श्री कुलदीप सिंहजी मुंद्रा, संयुक्त सचिव श्री जयेंद्र सिंह राठौड, कोषाध्यक्ष श्री विश्वेष दवे, संयुक्त कोषाध्यक्ष श्री हीराभाई पटेल, कार्यकारिणी सदस्य श्री अभिषेकसिंहजी चौहान एवं डॉ. अनुकूल निकम उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त दादरा एवं नगर हवेली के पूर्व शिक्षा निदेशक श्री एच. पी. सोलंकी, तीनों संस्थाओं की प्राचार्या, उपप्राचार्या, प्रधानाचार्या, उपप्रधानाचार्या, प्राध्यापकगण, शिक्षकगण, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।दीप प्रज्वलन के बाद अतिथियों का सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, ट्रस्ट पदाधिकारियों, विद्यार्थियों और मीडिया प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।तत्पश्चात श्रीमती देवकीबा मोहनसिंहजी चौहान कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड साइंस की प्राचार्या डॉ. सीमा पिल्लई ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए संस्था की शैक्षणिक यात्रा तथा उपलब्धियों की जानकारी दी।कार्यक्रम के दौरान Centre for Distance and Online Education के प्रॉस्पेक्टस का औपचारिक लोकार्पण संस्था के अध्यक्ष श्री फतेहसिंहजी एम. चौहान के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय के विशेष निर्देशानुसार, दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र के निदेशक प्रो. (डॉ.) शिवाजी धोंडीराम सरगर द्वारा संस्था के अध्यक्ष श्री फतेहसिंहजी एम. चौहान को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान एवं दूरदर्शी नेतृत्व के सम्मानस्वरूप एक सम्मान चिन्ह भेंट किया गया। यह क्षण संस्था एवं उपस्थित सभी जनों के लिए अत्यंत गर्व और सम्मान का विषय रहा।प्रदेश में पहली बार दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा की बड़ी पहल दादरा एवं नगर हवेली में पहली बार इस प्रकार का दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र शुरू किया गया है। इस पहल से अब विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बड़े शहरों का रुख करने की मजबूरी नहीं रहेगी। जो छात्र नौकरी, पारिवारिक जिम्मेदारियों या आर्थिक कारणों से नियमित कॉलेज नहीं जा पाते, वे अब ऑनलाइन और दूरस्थ माध्यम से पढ़ाई पूरी कर सकेंगे।यह केंद्र उन युवाओं और कामकाजी लोगों के लिए विशेष अवसर लेकर आया है, जिन्होंने किसी कारणवश पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी या जो अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए डिग्री प्राप्त करना चाहते हैं।फतेहसिंह चौहान के संकल्प का परिणाम इस ऐतिहासिक पहल के पीछे लायंस क्लब ऑफ सिलवासा चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष फतेहसिंहजी एम. चौहान और उनकी टीम का दृढ़ संकल्प, वर्षों का प्रयास, शिक्षा के प्रति समर्पण और दूरदर्शी सोच रहा है।फतेहसिंह चौहान ने शिक्षा के क्षेत्र में अपने संघर्षपूर्ण प्रयासों से प्रदेश में उच्च शिक्षा की मजबूत नींव रखी। वर्ष 1983 में मात्र 13 विद्यार्थियों से शुरू हुई यह शैक्षणिक यात्रा आज लगभग 7000 विद्यार्थियों तक पहुंच चुकी है।मुंबई विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज की स्थापना आसान नहीं थी। इसके लिए उन्हें अनेक प्रशासनिक और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। शिक्षा को लेकर उनका दृढ़ संकल्प ही था कि तमाम चुनौतियों और कानूनी प्रक्रियाओं के बावजूद उन्होंने प्रदेश में मुंबई विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।आज उसी जुनून और समर्पण का परिणाम है कि मुंबई विश्वविद्यालय स्वयं सिलवासा में दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र लेकर आया है, जो प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।नौकरीपेशा, महिलाओं और पढ़ाई छोड़ चुके युवाओं के लिए बड़ा अवसर- फतेहसिंहजी चौहान इस अवसर पर अपने संबोधन में ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री फतेहसिंहजी एम. चौहान ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में अवसरों की समानता स्थापित करने का सबसे प्रभावी साधन है। उन्होंने कहा कि समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है जब शिक्षा का प्रकाश हर उस व्यक्ति तक पहुँचे, जो किसी कारणवश पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था से दूर रह जाता है।उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में अनेक प्रतिभाशाली युवा ऐसे हैं जो पारिवारिक जिम्मेदारियों, आर्थिक परिस्थितियों या नौकरी के कारण नियमित कॉलेजों में जाकर पढ़ाई नहीं कर पाते। ऐसे युवाओं के लिए दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र एक नई उम्मीद और नया रास्ता लेकर आया है, जहाँ वे अपनी सुविधानुसार पढ़ाई जारी रखते हुए अपने भविष्य को नई दिशा दे सकेंगे।फतेहसिंह चौहान ने विशेष रूप से स्थानीय युवाओं और प्रदेश में कार्यरत कर्मचारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि दादरा एवं नगर हवेली औद्योगिक दृष्टि से तेजी से विकसित हो रहा क्षेत्र है, जहाँ हजारों युवा उद्योगों और कंपनियों में कार्यरत हैं। अब इस केंद्र के माध्यम से वे अपने काम के साथ-साथ उच्च शिक्षा भी प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उनके करियर में उन्नति के नए अवसर खुलेंगे और प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता भी मजबूत होगी।उन्होंने यह भी कहा कि समाज में अनेक गृहिणियां ऐसी होती हैं जिनकी शिक्षा किसी कारणवश बीच में रुक जाती है। परिवार की जिम्मेदारियों के कारण वे अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पातीं, लेकिन अब ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से वे घर बैठे अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी कर सकती हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह केंद्र केवल एक शैक्षणिक व्यवस्था नहीं, बल्कि समाज के उन सपनों को नया जीवन देने का माध्यम है जो परिस्थितियों के कारण अधूरे रह गए थे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से प्रदेश के युवाओं, महिलाओं और कामकाजी लोगों को नई प्रेरणा मिलेगी और वे शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन में नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेंगे।डिजिटल शिक्षा से बदलेगी पढ़ाई की तस्वीर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित Centre for Distance and Online Education के निदेशक प्रो. (डॉ.) शिवाजी धोंडीराम सरगर ने कहा कि डिजिटल युग में दूरस्थ और ऑनलाइन शिक्षा विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम बनती जा रही है।उन्होंने बताया कि इस माध्यम से वे छात्र भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं जो नौकरी करते हैं, किसी दूरस्थ क्षेत्र में रहते हैं या पारिवारिक कारणों से नियमित कॉलेज नहीं जा पाते।
मीडिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण:कार्यक्रम में उपस्थित मुंबई विश्वविद्यालय के उप-पंजीयक (जनसंपर्क) डॉ. लीलाधर वासुदेव बंसोड़ ने कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक पहल को समाज तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।उन्होंने कहा कि जब शिक्षा से जुड़ी सकारात्मक खबरें समाज तक पहुंचती हैं, तो अधिक से अधिक लोग शिक्षा की ओर प्रेरित होते हैं।

