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8 भारत रत्न देने वाली प्रतिष्ठित मुंबई यूनिवर्सिटी ने शिक्षा को समर्पित फतेहसिंहजी चौहान को किया सम्मानित पूरे प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि

Written by krishnanewsnetwork

सिलवासा। कभी-कभी किसी एक व्यक्ति का सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं होता। वह उस भूमि की मिट्टी का सम्मान बन जाता है, जिसने उसे गढ़ा है।
दादरा और नगर हवेली एवं दमण दीव की शांत धरती पर शायद पहली बार ऐसा अवसर आया है, जब देश की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था University of Mumbai ने सिलवासा के समाजसेवी, उद्योगपति, शिक्षाविद एवं लायंस क्लब ऑफ सिलवासा चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन फतेहसिंहजी एम. चौहान को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया है।
यह वही विश्वविद्यालय है, जिसने भारत को आठ भारत रत्न जैसी सर्वोच्च विभूतियाँ दी हैं। ऐसे गौरवशाली इतिहास वाले विश्वविद्यालय ने सिलवासा आकर फतेहसिंहजी चौहान को सम्मानित किया। यह सम्मान एक संदेश है कि शिक्षा के लिए किया गया समर्पण कभी अनदेखा नहीं जाता।
फतेहसिंहजी चौहान का कार्य केवल विद्यालय या कॉलेज चलाने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने शिक्षा को अवसर से जोड़ा, और अवसर को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने का प्रयास किया।
आज जब उच्च शिक्षा तक पहुँच कई युवाओं के लिए एक चुनौती बन जाती है, तब ऐसे प्रयास यह प्रश्न भी उठाते हैं कि क्या शिक्षा केवल डिग्री का माध्यम है, या समाज को दिशा देने का साधन?
सिलवासा और पूरे दादरा-नगर हवेली के लिए यह सम्मान इसलिए भी विशेष है, क्योंकि अक्सर छोटे प्रदेशों के प्रयास बड़े मंचों तक पहुँचते-पहुँचते कहीं खो जाते हैं। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। इस बार सिलवासा की एक आवाज़ मुंबई के उस ऐतिहासिक शैक्षणिक मंच तक पहुँची, जहाँ से देश की अनेक विभूतियों की यात्रा शुरू हुई है।
शायद यही शिक्षा की असली शक्ति है कि वह सीमाओं में नहीं बंधती।
और जब किसी प्रदेश की मिट्टी से निकला प्रयास राष्ट्रीय संस्थानों की दृष्टि में सम्मान बन जाए, तो वह केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाता है।

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