नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव के प्रशासक समेत नौ अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को बहाल करने से साफ इनकार कर दिया। दिवंगत सांसद मोहन डेलकर आत्महत्या प्रकरण में दर्ज यह एफआईआर बॉम्बे हाईकोर्ट ने पहले ही रद्द कर दी थी, जिसे अब सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा है।यह याचिका दिवंगत सांसद के बेटे अभिनव डेलकर ने दायर की थी। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 4 अगस्त को सुनवाई पूरी करने के बाद आज अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बॉम्बे हाईकोर्ट का 8 सितंबर, 2022 का आदेश ही अंतिम रूप से कायम रहेगा।इससे पहले मुंबई पुलिस ने 2021 में होटल में मृत पाए गए मोहन डेलकर के कथित सुसाइड नोट के आधार पर नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने जांच और तथ्यों को परखते हुए एफआईआर को निराधार मानते हुए रद्द कर दिया था।सु
प्रीम कोर्ट के इस फैसले से प्रशासक और अन्य अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से चली आ रही कानूनी अनिश्चितता अब समाप्त हो गई है। प्रदेश प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय को न्याय की जीत और अधिकारियों की प्रतिष्ठा की पुनःस्थापना के रूप में देखा जा रहा है।

