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खानवेल में आदिवासी घरों पर चला बुलडोजर, भड़का जन आक्रोश; सांसद उमेश पटेल पहुंचे मौके पर, प्रशासन को दी चेतावनी

संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली और दमन दीव के खानवेल विस्तार में बीते दिनों गरीब आदिवासी परिवारों के आशियानों पर प्रशासन द्वारा चलाए गए बुलडोजर की घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। इस कार्रवाई के विरोध में हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग एकत्रित हुए और प्रशासन के खिलाफ तीव्र विरोध जताया, प्रशासन ने बिना कोई वैकल्पिक व्यवस्था किए, खानवेल क्षेत्र में कई आदिवासी परिवारों के घरों को तोड़ दिया। इससे प्रभावित परिवारों के सामने जीवन यापन का संकट खड़ा हो गया है। इस घटना को लेकर जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।इस गंभीर मसले का संज्ञान लेते हुए दमन दीव के सांसद उमेश पटेल तुरंत घटना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। सांसद उमेश पटेल ने कहा कि प्रशासन का यह रवैया अत्यंत अमानवीय है और गरीब आदिवासियों के अधिकारों का खुला उल्लंघन है।आदिवासी एकता परिषद द्वारा इस मुद्दे को लेकर खानवेल विस्तार में एक रैली और सभा का आयोजन प्रस्तावित था, लेकिन प्रशासन ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। बावजूद इसके, हजारों की संख्या में आदिवासी लोग फॉरेस्ट डिपो के पास एकत्रित हुए और शांतिपूर्ण ढंग से विरोध जताया।मौके पर पहुंचे सांसद उमेश पटेल ने आदिवासियों से शांतिपूर्वक व्यवहार करने की अपील की और बिना प्रशासनिक अनुमति कोई रैली या भाषण न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “यह केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं है, यह हमारे अस्तित्व, अधिकारों और गरिमा से जुड़ा सवाल है। हम इस विषय पर संगठित रणनीति बनाकर लोकतांत्रिक तरीके से प्रशासन को जवाब देंगे।”सांसद उमेश पटेल ने साथ ही प्रशासन को भी चेतावनी देते हुए कहा कि गरीबों पर अत्याचार बंद किया जाए और आदिवासियों को उनका अधिकार दिया जाए, अन्यथा इस अन्याय के खिलाफ एक व्यापक जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा।प्रभावित आदिवासियों और वहां मौजूद लोगों ने सांसद उमेश पटेल की बातों को गंभीरता से सुना और उनके सुझावों से सहमति जताई। उन्होंने भी प्रशासन की कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्वक संघर्ष करते रहेंगे।यह घटना न केवल प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रतीक है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अब आदिवासी समुदाय अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर संगठित स्वर उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी तूल पकड़ सकता है।

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