NRI केशव बटाक ने पश्चिम बंगाल की साम्प्रदायिक हिंसा से उपजी परिस्थितियों के बीच आज पीएम मोदी को भेजे पत्र में लिखा कि पश्चिम बंगाल में साम्प्रदायिक हिंसा को दस दिन होने को हैं। केन्द्र सरकार ने साम्प्रदायिक हिंसा प्रभावित मुर्शिदाबाद, मालदा, नॉर्थ 24 परगना जिलो में अब तक कोई जाँच दल, कोई संसदीय कमेटी या सरकार का कोई प्रतिनिधि मंडल व नुमाइंदा नहीं भेजा है! हालांकि राज्यपाल, मानवाधिकार व राष्ट्रीय महिला आयोग वहाँ गये हैं, जो कि नाकाफी है। हिंसा पीड़ितों की निगाहें प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर लगी हैं कि पीएम एवं सीएम आयें उनसे जुल्मो-सितम का दर्द सुनें और आतताई विधर्मियों की विनाशलीला अपनी आँखों से देखें। मगर केन्द्र सरकार और संसद से कोई दल बेकसूर हिन्दुओं पर हुए जुल्म की थाह लगाने पश्चिम बंगाल के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में अब तक नहीं गया है, जिससे हिंसा पीड़ितों में दु:ख व चिंता व्याप्त है।
भारत, यूके और दुनिया भर के देशों में बसे भारतीयों में पश्चिम बंगाल में बेकसूर हिन्दुओं की हत्यायें, मारने-पीटने, घरों-दुकानों को जलाने, उन्हें भगाने और केन्द्र सरकार के मूक दर्शक बन तमाशा देखने पर भारी प्रतिक्रिया है। भाजपा को वोट देने वाले हिन्दुओं में नाराजगी है कि पीएम मोदी और एचएम शाह को पश्चिम बंगाल प्रकरण में एक्शन लेने में क्यों सांप सूंघ जाता है ? सिर्फ हिन्दुओं का वोट लेने में ही मोदी-शाह को चुनावी रैलियों में दीदी! दीदी! कहने का साहस रहता है? चुनाव बाद ममता दीदी पर एक्शन लेने के वक्त दोनों शेरों का यह साहस कहाँ गायब हो जाता है? जनता यह बातें करते सुनीं जा रही है। इस तरह से तो भाजपा और आप दोनों ही हिन्दुओं का भरोसा खो देंगे। बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में बेकसूर हिन्दुओं पर इतना भयंकर अत्याचार हुआ मगर पीएम मोदी और एचएम अमित शाह ने ना कोई प्रभावी प्रतिक्रिया दी और ना कड़क एक्शन लिया, जो दुनिया भर के हिन्दुओं को अच्छी तरह से याद है। यह समय पश्चिम बंगाल सरकार को बर्खास्त कर वहाँ राष्ट्रपति शासन लगाने तथा केन्द्रीय सुरक्षा बलों के साये में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव कराने का है। नहीं तो पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश बनते देर नहीं लगेगी।

