लंदन। एनआरआई ग्रुप लंदन-यूके के कन्वीनर केशव बटाक ने 20 मार्च को इंडियन हाईकमीशन पर खालिस्तानियों के हमले और तिरंगे के अपमान के संदर्भ में उठाए कदमों के बारे में जानकारी मांगी है। केशव बटाक ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में कहा कि इंडियन हाई कमीशन (लंदन) पर 20 मार्च को खालिस्तानियों के हमले और तिरंगे के अपमान से हम करोड़ों भारतवंशियों में गहरी पीड़ा है। हम भारतवंशियों को विश्वास था कि भारत सरकार कड़े कदम उठाएगी। मगर खानापूर्तियों से अधिक कुछ नहीं होने से हम भारतवंशियों में घोर निराशा है। इससे भारत विरोधियों के हौसले बढ़ेंगे। भारत विरोधी घटनाएं बढ़ेंगी। ऐसे ‘फनों’ को हमें कुचलना होगा। अब ‘जबानी जमा खर्च’ से काम नहीं चलेगा। ‘चमत्कार’ दिखाना होगा। यूके में पाकिस्तान की शह पर खालिस्तानियों और ‘ पाकिस्तानी मानसिकता वाले भारतीयों’ की भारत विरोधी हरकतें बढ़ती जा रही हैं। ‘राष्ट्रमंडल’ की ‘राजधानी’ में ‘राष्ट्रमंडल राष्ट्र’ के ‘केन्द्र’ पर हमले व राष्ट्रध्वज के अपमान तथा हमलावर समूहों पर कड़क कार्रवाई नहीं होने से भारत को इस ‘कुनबे’ में बने रहने पर पुनर्विचार करना चाहिए।भारत को’ इजराइली’ नीति अपनानी होगी। तभी खालिस्तानियों जैसे भारत विरोधी जमातों और उसके सरपरस्त देशों की मुश्कें कसी जा सकेंगी। ‘राष्ट्र प्रमुखों की मित्रता’ को ऐसे ‘संकंटों’ में ‘मोचक’ बनाना चाहिए। यही कूटनीति है। प्रधानमंत्री जी! इंडियन हाई कमीशन पर हमले व तिरंगे के अपमान को हमने 140 करोड़ भारतीयों और करोड़ों भारतवंशियों का अपमान समझते हुए यूके के पीएम श्री ऋषि सुनक को कड़ा पत्र लिख कर ‘ खालिस्तानियों’ व खालिस्तानी समूहों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा ‘ हाई कमीशन- स्टाफ’ की अधिक सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा था। जवाबी पत्र में यूके ‘ होम ऑफिस’ ने हमसे इंडियन हाई कमीशन व स्टाफ की सुरक्षा की समीक्षा कर जरूरत मुताबिक सिक्युरिटी टाइट करने का आश्वासन दिया है। मगर इंडियन गवर्नमेंट ने इस मामले में क्या एक्शन लिया ? इंडियन गवर्नमेंट के एक्शन का क्या परिणाम निकला ? ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भारत सरकार ने क्या पॉलिसी विचारी है ? इसे भारतवासियों और दुनिया भर के करोड़ों भारतवंशियों को बताने की जरूरत है।इस पर भी ‘ मन की बात’ होनी चाहिए। यकीनन इंडियन हाई कमीशन (लंदन) की सुरक्षा को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाये जाने की जरूरत है। इंडियन हाई कमीशन पर भारतीय सुरक्षा बलों की तैनाती जरूरी है। यूके में सक्रिय खालिस्तानी समूहों की नकेल कसने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए जाने चाहिए। इंडिया-यूके संबंध जरूरी हैं मगर भारत के स्वाभिमान की कीमत पर नहीं।

भारतबंधु केशव बटाक ने सेन्ट्रल लंदन से जारी प्रेस बयान में कहा कि ” भारतद्रोहियों से कोई मुरव्वत नहीं होनी चाहिए। खालिस्तानी हों या ‘पाकिस्तानी माइंडेड’ भारतीय दोनों ‘भारतद्रोही’ हैं। हमने लेस्टर-लंदन-यूके में ‘इन दोनों’ का भारतद्रोही रूप देखा है। ऐसे गद्दारों से ‘गन की बात’ होनी चाहिए। यूके में ‘पाकिस्तानी मानसिकता’ वाले इंडियंस एक दिन यूके को ही भारी पड़ेंगे। यह भी ‘तुष्टीकरण’ ही है। भारत भी ‘तुष्टीकरण’ का दंश झेल रहा है। इन ‘तुष्टीकरण’ के पोषकों से भी ‘ठन के बात ‘ होनी चाहिए।

